MP Board Class 7th Solution For Sahayak Vachan Chapter 1 : सदाचार

Class 7th सहायक वाचन Solution

खण्ड 1 : नैतिक शिक्षा

पाठ 1 : सदाचार

लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. ‘सदाचार’ से क्या आशय है ?

उत्तर – सदाचार – ‘सत्य का आचरण करना ही सदाचार कहलाता है। “
प्रश्न 2. सदाचारी व्यक्ति में कौन-कौन से गुण होते हैं ?
उत्तर – सदाचारी व्यक्ति के गुण-सदाचारी व्यक्ति में निम्नलिखित गुण होते हैं—

(1) सत्य भाषण, (2) उदारता, (3) मृदुल व्यवहार, (4) विनम्रता, (5) सहानुभूति, (6) सौहार्द, (7) दृढ़संकल्प, (8) शक्ति, (9) त्याग, (10) बलिदान, एवं (11) प्रेम आदि।
प्रश्न 3. विधवा ने राजा को अपने कौन-से अनमोल रत्न दिखलाए ?
उत्तर – विधवा ने राजा को अपने बेटों रूपी चार अनमोल रत्न दिखलाए।
प्रश्न 4. विद्यालय से घर आते ही विधवा माँ के बालकों ने कौन-सा कार्य किया ?
उत्तर- -विद्यालय से घर आते ही विधवा माँ के बालकों ने अपना-अपना बस्ता निर्धारित स्थान पर रखा और माँ के चरण छुए तथा कुछ खा-पीकर चारों पढ़ने बैठ गए।
प्रश्न 5. पानी भरने वाली स्त्रियों के पुत्र क्या-क्या कार्य करते थे ?
उत्तर – पहली स्त्री का पुत्र पहलवान है जो कुश्ती प्रतियोगिताओं में भाग लेता है। दूसरी स्त्री का पुत्र जज है जो कुर्सी पर बैठकर फैसला करता है। तीसरी स्त्री का पुत्र ज्योतिषी है जो लोगों के भविष्य बताता है। चौथी स्त्री का पुत्र बिना पढ़ा-लिखा है। वह माँ की सेवा करता है तथा अपनी पढ़ाई के साथ-साथ गाँव भर की चिन्ता करता है।
प्रश्न 6. इन चारों पुत्रों में किस पुत्र का स्वभाव आपको सबसे अच्छा लगा और क्यों ?
उत्तर–चारों पुत्रों में चौथे पुत्र का स्वभाव सबसे अच्छा लगा क्योंकि उस बालक ने आते ही सबसे पहले अपनी माँ के सिर से घड़ा उतार कर अपने सिर पर रखा, पोटली बगल में दबाई। उसकी आँखों में आँसू थे। वह कह रहा था कि, “मैं बड़ा अभागा हूँ जो मेरे जीते जी तुझे पानी भरना पड़ रहा है।” जबकि बाकी तीनों स्त्रियों के पुत्रों को अपनी-अपनी माँ की कोई चिन्ता नहीं थी। वे उन्हें ताने मारते हुए आगे निकल गए।
प्रश्न 7. तीनों स्त्रियों के सिर शर्म से क्यों झुक गए ?
उत्तर – तीनों स्त्रियों के सिर शर्म से झुक गए क्योंकि वे चौथी स्त्री के पुत्र पर ताना मार रही थीं। वह अपनी माँ का भक्त और उसकी चिन्ता रखने वाला निकला तथा वे अपने जिन पुत्रों की तारीफ के पुल बाँध रही थीं, उन्हें अपनी माँ की कोई चिन्ता नहीं थी। कोई आदर सम्मान ही नहीं था।