MP Board Class 7th Social Science Civics Solution Chapter 1 : समानता

म.प्र. बोर्ड कक्षा सातवीं संपूर्ण हल- नागरिकशास्त्र – सामाजिक एवं राजनैतिक जीवन 2 (Civics: Social & Political Life – II )

इकाई 1 : भारतीय लोकतंत्र में समानता

पाठ 1 : समानता

प्रश्न – अभ्यास (पाठ्यपुस्तक से)

महत्वपूर्ण बिन्दु  :

  • भारत एक लोकतान्त्रिक देश है। ‘समानता’ लोकतन्त्र की मुख्य विशेषता है।
  • ‘सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार’ का विचार सभी लोकतन्त्रों का आवश्यक पहलू है।
  • देश के प्रत्येक वयस्क को चाहे वह स्त्री हो, पुरुष हो, धनी हो, निर्धन हो या किसी भी जाति का हो, उसे मतदान करने का अधिकार है।
  • समानता को स्थापित करने के लिए संविधान में कहा गया है, “राज्य किसी नागरिक के खिलाफ सिर्फ धर्म, मूल, वंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी भी आधार पर कोई भेदभाव नहीं करेगा।”
  • मध्याह्न भोजन की योजना सर्वप्रथम तमिलनाडु में प्रारम्भ की गयी।
  • एक अफ्रीकी अमेरिकन महिला रोजा पार्क्स ने असमानता के खिलाफ एक विशाल आन्दोलन प्रारम्भ किया जो कि नागरिक अधिकार आन्दोलन कहलाया।

महत्त्वपूर्ण शब्दावली

गरिमा – अपने आपको और दूसरे व्यक्तियों को सम्मान योग्य समझना।  

संविधान – वह दस्तावेज जिसमें देश की जनता व सरकार द्वारा पालन किए जाने वाले नियमों अधिनियमों को लिखा गया

नागरिक अधिकार आन्दोलन – एक आन्दोलन जो संयुक्त राज्य अमेरिका में 1950 के दशक के अन्त से प्रारम्भ हुआ। जिसमें अफ्रीकी-अमेरिकन लोगों ने नस्लगत भेदभाव को समाप्त करने और समान अधिकारों की माँग की।

पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न – आपके विचार से समानता के बारे में शंका करने के लिए कांता के पास क्या पर्याप्त कारण हैं ? उपरोक्त कहानी के आधार पर उसके ऐसा सोचने के तीन कारण बताइए।

उत्तर – समानता के बारे में शंका करने के लिए कान्ता के पास पर्याप्त निम्नलिखित कारण हैं

(1) कान्ता एक झोपड़पट्टी में रहती है। उसके घर के पीछे नाला है जिससे उसकी बच्ची बार-बार बीमार पड़ती है। वह साफ बस्ती में नहीं रह सकती क्योंकि वह गरीब महिला है।

(2) वह जरूरत पड़ने पर एक भी दिन की छुट्टी नहीं ले सकती, जबकि नियमित उद्यमी को महीने की चार छुट्टियाँ मिलती हैं।

(3) उसे अपने बच्चों का इलाज कराने के लिए सरकारी अस्पताल में लम्बी लाइन लगानी पड़ती है, जबकि सामान्य लोग निजी अस्पताल में अपने बच्चों का इलाज कराते हैं जिसमें लम्बी लाइन नहीं लगानी पड़ती है।

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प्रश्न – दिए गए वैवाहिक विज्ञापनों में जाति की सूचना देने वाले अंशों पर गोला बनाइए।

उत्तर –

प्रश्न 1. आपके विचार से ओमप्रकाश वाल्मीकि के साथ उसके शिक्षक और सहपाठियों ने असमानता का व्यवहार क्यों किया था ? अपने आपको ओमप्रकाश वाल्मीकि की | जगह रखते हुए चार पंक्तियाँ लिखिए कि उक्त स्थिति में आप कैसा अनुभव करते?

उत्तर – हमारे समाज में जातीय आधार पर भेदभाव किया जाता है। ओमप्रकाश वाल्मीकि एक दलित लड़का था। इसी आधार पर ओमप्रकाश वाल्मीकि के साथ उसके शिक्षक और सहपाठियों ने असमानता का व्यवहार किया।

अगर हम ओमप्रकाश वाल्मीकि की जगह होते तो उक्त स्थिति में हमें निम्न तरह का अनुभव होता

(1) समाज में फैली असमानता पर असन्तोष पैदा होता।

(2) भेदभाव करने वाले लोगों से लड़ने का मन करता।

(3) अपने आपको असम्मानित, अपमानित महसूस करता।

(4) हमारे मन में कुण्ठा, आत्मग्लानि उत्पन्न होती।

प्रश्न 2. आपके विचार से अंसारी दम्पत्ति के साथ असमानता का व्यवहार क्यों किया जा रहा था ? यदि आप अंसारी दम्पत्ति की जगह होते और आपको रहने के लिए इस कारण जगह न मिलती क्योंकि कुछ पड़ोसी आपके धर्म के कारण आपके पास नहीं रहना चाहते, तो आप क्या करते ?

उत्तर – भारत विविधताओं का देश है। यहाँ विभिन्न जाति, धर्म, भाषा, संस्कृति के लोग निवास करते हैं और इसी आधार पर अपने धर्म संस्कृति को अन्य से श्रेष्ठ समझते हैं। अंसारी दम्पत्ति के साथ धर्म की विभिन्नता होने के कारण असमानता का व्यवहार किया गया। यदि हमें अंसारी दम्पत्ति की तरह रहने के लिए जगह नहीं मिलती तो उन्हें समझाने का प्रयास करते तथा साथ ही यह आश्वासन दिलाते कि हम भी अन्य पड़ोसियों की तरह ही नियमों का पालन करेंगे तथा अपने व्यवहार से उनके हृदय परिवर्तन का प्रयास करते।

प्रश्न 1. यदि आप अंसारी परिवार के एक सदस्य होते, तो प्रॉपर्टी डीलर के नाम बदलने के सुझाव का उत्तर किस प्रकार देते?

उत्तर – यदि हम अंसारी परिवार के एक सदस्य होते तो प्रॉपर्टी डीलर के नाम बदलने के सुझाव का उत्तर निम्नलिखित प्रकार से देते

(1) नाम बदलकर अपनी पहचान छुपाना गलत है क्योंकि झूठ का पता चलने का डर हमेशा बना रहेगा।

(2) नाम बदलने के बाद अपने पर्व, त्यौहार इत्यादि को छोड़ना मुश्किल होगा।

प्रश्न 2. क्या आपको अपने जीवन की कोई ऐसी घटना याद है, जब आपकी गरिमा को चोट पहुँची हो ? आपको उस समय कैसा महसूस हुआ था ?

उत्तर -जी हाँ, एक घटना मुझे याद है जब मैं अपने मम्मी-पापा के साथ मन्दिर में दर्शन करने गया था, वहाँ पर सभी भगवान के दर्शन का इन्तजार कर रहे थे। भीड़ भी काफी थी तभी एक दम्पत्ति ने पंडित जी को कुछ पैसे दिये और दर्शन करने चले गये। उस समय मुझे लगा कि यह तो गलत है। ईश्वर के यहाँ तो सभी बराबर हैं और यहाँ आर्थिक असमानता के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है। इससे मैंने अपनी गरिमा पर चोट महसूस की।

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प्रश्न 1. मध्याह्न भोजन कार्यक्रम क्या है? क्या आप इस कार्यक्रम के तीन लाभ बता सकते हैं ? आपके विचार से यह कार्यक्रम किस प्रकार समानता की भावना बढ़ा सकता

उत्तर – मध्याह्न भोजन एक ऐसा कार्यक्रम है जिसके अन्तर्गत सरकारी प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को दोपहर का

भोजन स्कूल द्वारा मुफ्त दिया जाता है। इस कार्यक्रम के काफी सकारात्मक प्रभाव हुए।

(1) दोपहर का भोजन मिलने के कारण गरीब बच्चों ने अधिक संख्या में स्कूल में प्रवेश लेना प्रारम्भ किया।

(2) अधिक संख्या में बच्चों ने नियमित रूप से स्कूल जाना शुरू कर दिया।

(3) इस कार्यक्रम ने निर्धन छात्रों की भूख मिटाने में भी सहायता की है, जो प्रायः खाली पेट स्कूल आते हैं और इस कारण पढ़ाई पर ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाते हैं। मध्याह्न भोजन कार्यक्रम निम्नलिखित प्रकार से समानता की भावना बढ़ा सकता है

(i) इस कार्यक्रम के अन्तर्गत सभी सामाजिक वर्गों एवं धर्मों के बच्चे साथ-साथ भोजन करते हैं, इससे उनमें अपने श्रेष्ठ या निम्न होने की भावना में जहाँ एक तरफ कमी आएगी वहीं दूसरी तरफ समानता की भावना में वृद्धि होगी।

(ii) वे एक ही जगह पर एक ही तरह के भोजन को खाते हैं जिससे उनमें समानता की भावना आती है।

अतः कहा जा सकता है कि मध्याह्न भोजन कार्यक्रम ने समानता की भावना को बढ़ाया है।

प्रश्न 2. अपने क्षेत्र में लागू की गई किसी एक सरकारी योजना के बारे में पता लगाइए। इस योजना में क्या किया जाता है ? यह किस के लाभ के लिए बनाई गई है ?

उत्तर – हमारे क्षेत्र में निःशुल्क पाठ्य-पुस्तक वितरण की सरकारी योजना प्रारम्भ की गई है। इस योजना में प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में अध्ययनरत बालक-बालिकाओं को निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं।

शासकीय प्राथमिक शालाओं में नामांकित सभी बालकबालिकाओं तथा शासकीय माध्यमिक शालाओं में नामांकित सभी बालिकाओं व अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के बालक, गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे अन्य पिछड़ा वर्ग के परिवारों के बालकों को इस योजना का लाभ मिलता है।

प्रश्न 1. लोकतन्त्र में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार क्यों महत्वपूर्ण है ?

उत्तर – लोकतन्त्र में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताता है कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जाति, रंग, धर्म, लिंग या स्थिति के बावजूद वोट देने का अधिकार रखता है और प्रत्येक वोट का समान मूल्य होता है। यह अधिकार समानता के विचार पर आधारित है।

प्रश्न 2. बॉक्स में दिए गए संविधान के अनुच्छेद 15 के अंश को पुनः पढ़िए और दो ऐसे तरीके बताइए जिनसे यह अनुच्छेद असमानता को दूर करता है।

उत्तर (1) राज्य किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई भेद नहीं करेगा।

(2) किसी भी नागरिक पर केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश या राज्य निधि से पोषित कुओं, तालाबों, स्नान घाटों, सड़कों व सार्वजनिक समागम के स्थानों के उपयाग पर प्रतिबन्ध नहीं लगाया जा सकता।

प्रश्न 3. ओमप्रकाश वाल्मीकि का अनुभव, अंसारी दम्पत्ति के अनुभव से किस प्रकार मिलता था ?

उत्तर – ओमप्रकाश वाल्मीकि का अनुभव तथा अंसारी दम्पत्ति का अनुभव दोनों मामलों में, उनकी गरिमा का उल्लंघन किया गया था। ओमप्रकाश एक निम्न जाति का था। एक निम्न जाति का सदस्य होने के कारण विद्यालय में उसके साथ भेदभाव किया गया और शिक्षक द्वारा झाडू लगाने के लिए मजबूर किया गया।

अंसारी दम्पत्ति मुसलमान थे। केवल धर्म के कारण वे शहर में किराए का मकान न ले पाए।

इस प्रकार ओमप्रकाश वाल्मीकि तथा अंसारी दम्पत्ति दोनों के साथ क्रमशः जाति तथा धर्म के आधार पर असमानता का व्यवहार किया गया।

प्रश्न 4.”कानून के सामने सब व्यक्ति बराबर हैं”इस कथन से आप क्या समझते हैं ? आपके विचार से यह लोकतन्त्र में महत्वपूर्ण क्यों है ?

उत्तर-“कानून के सामने सब व्यक्ति बराबर हैं।” इस कथन से हम समझते हैं कि देश के अन्तर्गत सभी न्यायालयों द्वारा कानून के सामने सभी व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार किया जाएगा, चाहे वह व्यक्ति अमीर हो या गरीब, सरकारी अधिकारी हो या कोई गैर-सरकारी व्यक्ति, कानून से कोई भी ऊपर नहीं है।

कानून के सामने समानता लोकतन्त्र का एक मूल तत्व है। लोकतन्त्र सभी व्यक्तियों के साथ समानता का व्यवहार करता है, और किसी भी आधार पर किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करता इसलिए कानून के सामने समानता लोकतन्त्र में अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 5. दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार उनको समान अधिकार प्राप्त हैं और समाज में उनकी पूरी भागीदारी सम्भव बनाना सरकार का दायित्व है। सरकार को उन्हें निःशुल्क शिक्षा देनी है और विकलांग बच्चों को स्कूलों की मुख्यधारा में सम्मिलित करना है। कानून यह भी कहता है कि सभी सार्वजनिक स्थल, जैसे-भवन, स्कूल आदि में ढलान बनाए जाने चाहिए, जिससे वहाँ विकलांगों के लिए पहुँचना सरल हो।

चित्र को देखिए और उस बच्चे के बारे में सोचिए, जिसे सीढ़ियों से नीचे लाया जा रहा है। क्या आपको लगता है कि इस स्थिति में उपर्युक्त कानून लागू किया जा रहा है ? वह भवन में आसानी से आ-जा सके, उसके लिए क्या करना आवश्यक है ? उसे उठाकर सीढ़ियों से उतारा जाना, उसके सम्मान और उसकी सुरक्षा को कैसे प्रभावित करता है ?

उत्तर –

(1) चित्र में दिखाया गया बच्चा, जिसे सीढ़ियों से  नीचे लाया जा रहा है, उसमें दिव्यांगजन अधिकार कानून का पालन नहीं किया जा रहा है, क्योंकि भवन में ढलान नहीं बना हुआ है। इसलिए बच्चे को सीढ़ियों के माध्यम से लाया जा रहा है

(2) विभिन्न सार्वजनिक जगहों, जैसे-स्कूल, अस्पताल आदि में ढलवाँ सीढ़ियों की व्यवस्था निश्चित रूप से की जानी चाहिए ताकि दिव्यांग व्यक्तियों की भी इन जगहों तक पहुँच आसान हो सके।

(3) दूसरे व्यक्तियों द्वारा सीढ़ियों से नीचे लाए जाने के कारण इस दिव्यांग बच्चे की गरिमा को ठेस पहुँच रही है, क्योंकि उसके मन में यह हीन भावना आ सकती है कि वह अक्षम है, दूसरों पर निर्भर है। उसे इस तरह से सीढ़ियों से चढ़ाने और उतारने में दुर्घटना भी हो सकती है जिससे उसे शारीरिक चोट पहुँच सकती है।

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