पाठ 2 आसन

MP Board Class 8th Solution For Hindi Medium Sahayak Vachan म.प्र. बोर्ड कक्षा 8th का संपूर्ण हल सहायक वाचन

खण्ड 2 योग शिक्षा

पाठ 2 आसन

पद्मासन

प्रश्न 1. पद्मासन करने की विधि संक्षेप में लिखिए।

उत्तर- विधि-

(i) दोनों पैरों को सामने फैलाकर स्वच्छ कम्बल पर बैठ जाइए।

(ii) बाएँ पैर की एड़ी को पेट से स्पर्श करते हुए दाहिनी जंघा पर और दाहिने पैर की एड़ी को पेट से स्पर्श करते हुए बायीं जंघा पर रखें तथा दोनों घुटनों को जमीन पर टिकाने का प्रयास करें।

(iii) हाथ की हथेलियों को ऊपर की ओर रखते हुए घुटनों पर रखें और सामने की ओर देखें।

(iv) रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। श्वास निकाल कर पसलियों को ऊपर की ओर खींचे।

(v) प्राणायाम में मन एकाग्र करते हुए जितनी देर आरामपूर्वक बैठ सकें, बैठे।

(vi) वापस करते समय पहले दाएँ पैर को जाँघ से उतारकर सीधा रखें, फिर बायाँ पैर नीचे करें।

प्रश्न 2. पद्मासन से होने वाले लाभों को लिखिए।

उत्तर- लाभ-

(i) पद्मासन समस्त रोग निवृत्ति के लिए उपयुक्त है।

(ii) मन एकाग्र होता है।

(iii) इससे रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है।

(iv) इसके अभ्यास से पाचन शक्ति बढ़ती है।

(v) पैरों की नाड़ियाँ तथा नसें शुद्ध होती हैं।

प्रश्न 3. पद्मासन का अभ्यास किसे नहीं करना चाहिए?

उत्तर – साइटिका अथवा रीढ़ के निचले हिस्से में दर्द से पीड़ित व्यक्तियों को पद्मासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

कर्णपीड़ासन

प्रश्न 1. कर्णपीड़ासन के प्रमुख लाभों को लिखिए।

उत्तर – लाभ-

(i) इस आसन के निरन्तर अभ्यास करने से मस्तिष्क, कान, नाक, गला, नेत्र आदि सम्बन्धी विकार नहीं होते। ये सारे अंग स्वस्थ होते हैं।

(ii) मोटापा, श्वास रोग, दमा, कब्ज, रक्तदोष आदि दूर होते हैं।

(iii) हृदय एवं फेफड़े पुष्ट होते हैं।

(iv) मेरुदण्ड लचीला व पुष्ट होता है।

(v) रक्त का प्रवाह सिर के भाग में तीव्र होने से मानसिक शक्ति बढ़ती है।

प्रश्न 2. कर्णपीड़ासन के बाद या विपरीत कौन-सा आसान करना चाहिए?

उत्तर – कर्णपीड़ासन के विपरीत मत्स्यासन का अभ्यास करना चाहिए।

प्रश्न 3. कर्णपीड़ासन का अभ्यास किसे नहीं करना चाहिए?

उत्तर-कन्धे का दर्द, कान बहने पर, नेत्र रोग, अत्यधिक सर्दी-जुकाम से पीड़ित व्यक्तियों को कर्णपीड़ासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 4. कर्णपीड़ासन की अन्तिम स्थिति में श्वास का क्या क्रम होता है?

उत्तर – कर्णपीड़ासन की अन्तिम स्थिति में श्वास पूरी तरह निकाल कर सामान्य करते हैं।

सर्पासन (भुजंगासन)

प्रश्न 1. सर्पासन नाम पड़ने का कारण लिखिए।

उत्तर-फन को ऊपर की ओर उठाए हुए सर्प जैसी आकृति बनने के कारण इसे सर्पासन कहते हैं।

प्रश्न 2. सर्पासन से शरीर में होने वाले लाभ लिखिए।

उत्तर-लाभ-

(i) पेट एवं कमर सम्बन्धी रोग दूर होते हैं।

(ii) रीढ़ तथा कमर में लोच बढ़ती है।

(iii) फेफड़े एवं हृदय स्वस्थ होते हैं।

(iv) कब्ज दूर होता है।

प्रश्न 3. सर्पासन की सावधानियों का उल्लेख करें।

उत्तर – उदर रोग, जैसे-हर्निया, एपेण्डेसाइटिस, अल्सर रोग से पीड़ित व्यक्तियों को इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

शलभासन

प्रश्न 1. शलभ का शाब्दिक अर्थ लिखते हुए शलभासन के तीन लाभों को लिखिए।

उत्तर-शलभ का शाब्दिक अर्थ टिड्डा है।

शलभासन के लाभ-

(i) कब्ज दूर होता है, पाचन शक्ति बढ़ती है।

(ii) नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं, हृदय व फेफड़े पुष्ट होते हैं।

(iii) क्लोम ग्रन्थि सक्रिय होने से मधुमेह की बीमारी मिटती है।

प्रश्न 2. शलभासन का अभ्यास कब करना चाहिए?

उत्तर-शलभासन का अभ्यास सर्पासन के बाद करना चाहिए।

प्रश्न 3. शलभासन में दोनों पैर जब भूमि से ऊपर होते हैं तब दृष्टि कहाँ होती है?

उत्तर-शलभासन में दोनों पैर जब भूमि से ऊपर होते हैं तब दृष्टि सामने होती है।

धनुरासन

प्रश्न 1. धनुरासन में श्वास-प्रश्वास की गति का उल्लेख करें।

उत्तर-श्वास भरते हुए हाथों के सहारे पैरों को ऊपर की ओर यथाशक्ति तानते हैं। थकान आने पर श्वास छोड़ते हुए पूर्व स्थिति में वापस आते हैं।

प्रश्न 2. धनुरासन से होने वाले किन्हीं तीन लाभों का उल्लेख करें।

उत्तर-लाभ-

(i) कब्ज एवं पित्त विकार दूर होते हैं।

(ii) मेरुदण्ड, पीठ, पेट सभी पुष्ट होते हैं।

(iii) स्नायु दुर्बलता दूर होती है।

प्रश्न 3. किन लोगों को धनुरासन नहीं करना चाहिए?

उत्तर – उच्च रक्तचाप, हृदय रोग एवं कमर दर्द से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

मकरासन

प्रश्न 1. मकरासन में शरीर को किस स्थिति में स्थापित किया जाता है?

उत्तर- मकरासन में शरीर को मकर की स्थिति में स्थापित किया जाता है। छाती के बल लेटकर दोनों पैर फैलाते हैं। पैर के पंजे बाहर की ओर तथा दोनों हाथों को कोहनी से मिलाकर हथेलियों को गाल पर स्थापित करते हैं तथा कमर को धड़ से थोड़ा ऊपर उठाते हैं।

प्रश्न 2. मकरासन के क्या लाभ हैं?

उत्तर – लाभ-

(i) बच्चों की लम्बाई बढ़ाने में सहायक है।

(ii) कुबड़ापन दूर होता है।

(iii) क्रोध दूर होता है।

(iv) उदर विकार दूर होते हैं।

(v) शारीरिक एवं मानसिक थकान दूर होती है।

(vi) फेफड़े, गले के विकार दूर होते हैं।

शशकासन

प्रश्न 1. शशकासन का यह नाम क्यों पड़ा?

उत्तर- इस आसन की आकृति बैठे हुए खरगोश जैसी प्रतीत होती है, इसलिए इसे शशकासन कहते हैं।

प्रश्न 2. शशकासन में आगे झुकते समय की श्वास की स्थिति का उल्लेख कीजिए।

उत्तर-शशकासन में आगे झुकते समय श्वास छोड़ते हैं।

प्रश्न 3. शशकासन किसे नहीं करना चाहिए?

उत्तरजिन्हें गर्दन, कमर एवं पीठ में दर्द हो, उन्हें शशकासन नहीं करना चाहिए।

सुप्त वज्रासन

प्रश्न 1. सुप्त वजासन में हथेलियों की स्थिति स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-सुप्त वज्रासन में हथेलियों को जंघा पर रखा जाता है

प्रश्न 2. सुप्त वज्रासन से शरीर के कौन-से अंग होते हैं लाभान्वित?

उत्तर-सुप्त वज्रासन से रीढ़ सर्वाधिक लाभान्वित होती है। फेफड़े तथा हृदय पुष्ट होते हैं, नेत्र ज्योति बढ़ती है।

प्रश्न 3. सुप्त वज्रासन के अभ्यास के दौरान कौन-कौन-सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए?

उत्तर-सावधानियाँ-

(i) गर्दन को झटका नहीं देना चाहिए।

(ii) पीछे लेटते समय हाथों का सहारा लेना चाहिए अन्यथा गिरने तथा सिर में चोट लगने की सम्भावना रहती है।

सिंहासन

प्रश्न 1. सिंहासन का यह नाम क्यों पड़ा?

उत्तर-इस आसन के अभ्यास में शेर की आकृति की स्थिति में आते हैं। अत: इस आसन का नाम सिंहासन पड़ा।

प्रश्न 2. सिंहासन के अभ्यास में जीभ की क्या स्थिति रहती है?

उत्तर-सिंहासन के अभ्यास में जीभ बाहर की ओर निकली होनी चाहिए जितनी निकाली जा सके।

प्रश्न 3. सिंहासन से होने वाले लाभों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर-लाभ-

(i) इससे गर्दन की माँसपेशियों का व्यायाम होता है।

(ii) रक्त संचरण की वृद्धि होती है।

(iii) गले एवं फेफड़े के रोग नहीं होते।

(iv) स्वर प्रभावी होता है।

(v) निर्भयता आती है।

अर्धमत्स्येन्द्रासन

प्रश्न 1. अर्धमत्स्येन्द्रासन किस प्राचीन मुनि के नाम से जाना जाता है?

उत्तर – अर्धमत्स्येन्द्रासन गोरखनाथ के गुरु मत्येन्द्रनाथ के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 2. अर्धमत्स्येन्द्रासन किस बीमारी के निदान में विशेष लाभकारी है?

उत्तर – अर्धमत्स्येन्द्रासन मधुमेह रोग के निदान में विशेष लाभकारी है।

प्रश्न 3. अर्धमत्स्येन्द्रासन शरीर की किन ग्रन्थियों को प्रभावित करता है?

उत्तर – अर्धमत्स्येन्द्रासन पेट की अन्तःस्रावी ग्रन्थियों एवं क्लोम ग्रन्थि को प्रभावित करता है।

मण्डूकासन

प्रश्न 1. मण्डूकासन का अभ्यास किन व्यक्तियों के लिए वर्जित है?

उत्तर-

(i) अल्सर रोग, उच्च रक्तचाप एवं हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों के लिए मण्डूकासन का अभ्यास वर्जित है।

(ii) पेट में किसी तरह की शल्य क्रिया होने पर भी इस आसन को नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 2. मण्डूकासन में हाथों की स्थिति का वर्णन कीजिए।

उत्तर-मण्डूकासन में दोनों हाथों की मुट्ठी बाँधकर नाभि (पेट) के अगल-बगल स्थापित करते हैं।

प्रश्न 3. मण्डूकासन का यह नाम क्यों पड़ा ?

उत्तर-मण्डूकासन में मेंढक के बैठने जैसी आकृति बनने के कारण इस आसन का नाम मण्डूकासन पड़ा।

पादाङ्गष्ठासन

प्रश्न 1. पादाङ्गुष्ठासन किस स्थिति में बैठकर किया जाता है?

उत्तर-पादाङ्गष्ठासन में पैरों की अंगुलियों तथा अंगुष्ठ के ऊपर उकहूँ की स्थिति में बैठकर किया जाता है।

प्रश्न 2. पादाङ्गुष्ठासन में पैरों की स्थिति पर प्रकाश डालिए।

उत्तर – दायें पैर की एड़ी को सीवनी (मूत्रेन्द्रिय एवं गुदा के बीच वाले भाग में) से लगाते हैं। बायें पैर को दायीं जंघा के ऊपर रखते हैं। दोनों हाथों को दोनों ओर टिकाकर शरीर का सन्तुलन एड़ी एवं पंजे पर बनाते हुए नमस्कार की स्थिति में लाते हैं। एक पैर से करने के पश्चात् दूसरे पैर से करते हैं।

वक्रासन

प्रश्न 1. वक्रासन का यह नाम क्यों पड़ा?

उत्तर – इस आसन में पीठ वाले भाग को वक्राकार मोड़ा

जाता है। इसलिए इस आसन का नाम वक्रासन पड़ा।

प्रश्न 2. इस आसन में शरीर का कौन- न-सा भाग सर्वाधिक  प्रभावित होता है?

उत्तर – इस आसन में कमर सर्वाधिक प्रभावित होती है।

प्रश्न 3. वक्रासन के लाभों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर-वक्रासन के लाभ-

(i) मेरुदण्ड लोचदार बनता है।

(ii) कब्ज दूर करने में सहायक है।

(iii) पाचन शक्ति बढ़ती है।

(iv) मधुमेह रोग में लाभकारी है।

कोणासन

प्रश्न 1. कोणासन और त्रिकोणासन में क्या अन्तर है ?

उत्तर – कोणासन एवं त्रिकोणासन दोनों ही खड़े होकर किये जाने वाले आसन हैं, परन्तु इनमें स्पष्ट अन्तर है। कोणासन में कमर से धड़ को सामने की ओर झुकाकर बायें हाथ से दायें पैर के पंजे को पकड़ा जाता है, साथ ही दायें हाथ को कंधे के ऊपर ताना जाता है। यही क्रिया हाथ एवं पैर बदलकर भी की जाती है, जबकि त्रिकोणासन में बायें पैर को बायीं ओर मोड़कर बायें हाथ से पैर के अंगूठे को पकड़ा जाता है तथा दायें हाथ को सिर के ऊपर जमीन के समानान्तर फैलाया जाता है। यह क्रिया भी हाथ एवं पैर बदलकर की जाती है। वास्तव में, कोणासन, त्रिकोणासन का ही प्रकारान्तर है।

प्रश्न 2. कोणासन की कोई तीन सावधानियाँ लिखें।

उत्तर-सावधानियाँ-

(i) स्लिप डिस्क में अत्यधिक कंधे व कमर दर्द में इस आसन को नहीं करना चाहिए।

(ii) उच्च रक्तचाप एवं हृदय रोगी न करें।

(iii) चक्कर आने की स्थिति में न करें।

त्रिकोणासन

प्रश्न 1.त्रिकोणासन का यह नाम क्यों पड़ा?

उत्तर-इस आसन में शरीर की स्थिति त्रिकोण जैसी बनती है, इसलिए इसे त्रिकोणासन कहते हैं।

प्रश्न 2.त्रिकोणासन में ग्रीवा की क्या स्थिति होती है ?

उत्तर-त्रिकोणासन में ग्रीवा त्रिकोण बनाती है।

प्रश्न 3. त्रिकोणासन के कोई दो लाभ लिखिए।

उत्तर-त्रिकोणासन के लाभ-

(1) कमर दर्द के निवारण में लाभकारी है।

(ii) पसलियों का दर्द ठीक होता है।

गरुड़ासन

प्रश्न 1. इस आसन का नाम गरुड़ासन क्यों पड़ा?

उत्तर – पुराणों में वर्णित पक्षी गरुड़ के नाम पर इस.आसन है, का नाम गरुड़ासन पड़ा है।

प्रश्न 2. गरुड़ासन में पैरों की क्या स्थिति होती है ?

उत्तर-गरुड़ासन में पैर रस्सी के समान लिपटे होते हैं।

प्रश्न 3. गरुड़ासन के कोई दो लाभ लिखिए।

उत्तर-गरुड़ासन के लाभ-

(i) साइटिका, गठिया रोग में लाभप्रद है।

(ii) भुजाओं, पिण्डलियों, टाँगों की नस-नाड़ियों एवं माँस-पेशियों को बल मिलता है।

 शवासन

प्रश्न 1. उस आसन का नाम बताइए, जो श्वास-प्रश्वास एवं हृदय की गति को सामान्य करता है।

उत्तर-शवासन, श्वास-प्रश्वास एवं हृदय की गति को सामान्य करता है।

प्रश्न 2. शवासन के दो लाभ लिखिए।

उत्तर-शवासन के लाभ-

(i) रक्तचाप की गति को सामान्य करता है।

(iii) अनिद्रा एवं तनाव दूर करता है।

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